बुधवार, 24 सितंबर 2008

बनिए उनका सहारा



बुजुर्गों को चाहिए अपनापन और प्यार। उनके साथ बात करने से कतराए बल्कि उनका अकेलापन बाँटने का प्रयत्न करे। बुजुर्गो के साथ बातचीत कराने के लिए धैर्य व समय की जरूरत होती है. यहीं वे लोग है जो हमारा आधार हमारी नीव होते है. आज का युवा वर्ग बुजुर्गों का उतना सम्मान नहीं करा पाते जितना वे चाहते है. हमें अपने आधार का हमेशा शुक्रिया अदा करना चाहिये उन्हें सही मान व सम्मान देना चाहिये.

बड़ती उम्र न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक क्षमता को भी प्रभावित करती है। यही कारण है की बुजुर्गों को अपनी बातों के साथ तारतम्य बैठाने में कठिनाई होती है. लेकिन इस वजह से रिश्तों में दूरी नही आना चाहिये. रिश्तों को ठोस बनाए रखने के लिए बातचीत ही एक मात्र उपाय है. अन्य लोगों द्वारा बुजुर्गों को न समझ पाना ही उन्हें एकांत प्रिय बना देता है.

हमें चाहिए की हम उनके दिल की सुने, उन्हें समझे ताकि उन्हें ये एहसास हों की उनकी भी इस दुनिया में एक पहचान हैं वजूद है। हमें बुजुर्गों के सामने एक श्रोता बनकर पेश होना चाहिए. उनकी बात बहुत ध्यान से सुनना चाहिये. असरकारक संवाद रिश्तों की गरमाहट बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते है. उन्हें हमे ये एहसास दिलाना चाहिए कि हम उनसे कितना प्यार करते है और उनकी हमें हमेशा जरूरत है. बुजुर्गों से उनकी यादों व किस्सो के बारे में पूछने से उन्हें ये यकीन होंगा की आप उन्हें अपना मानते हैं और उनसे बात करना चाहते हैं.

किसी गंभीर विषयों की बजाए सामान्य विषयों पर बात करना चाहिए। कोशिश करें की ऐसे विषयों पर बात हो जिसमें उनकी रुचि हो. बुजुर्गों से बच्चों की तरह नहीं बात करना चाहिए. अपनी तमाम जिम्मेदारियो को निभा कर जब व्यक्ति उम्र के इस पड़ाव पर आता हैं तो उसे सहारे की जरूरत होती हैं. निश्चित रुप से विचारों की भिन्नता हों सकती है टकराव भी हों सकता है लेकिन इसका मतलब ये कदापि नहीं कि हम उन्हें नजर अंदाज कर दे.

याद रखें ये वही बुजुर्ग है जिन्होंने हाथ पकड़ कर आपको आपकी मंजिल तक पहुचाया था। आज उन्हें आपकी जरूरत है. वो आँखें जिनकी रोशनी अब कम हों गई हैं वो शरीर जो अब लाठी को सहारा बनाकर चलता है अब भी आपके स्नेह और अपनत्व को पाने के लिए लालायित है. ऐसे में कहीं आप उनसे मुँह तो नहीं फेर रहे है.

यदि आप ऐसा कर रहे है तो अपनी जिंदगी के पन्नों को जरा गौर से देखिए आप पाएँगे की आपकी हर खुशी में वो आपके साथ थे हर दुख में आपका सहारा थे आज वो आपकी और हाथ बड़ा रहे है सोचिए मत उठिए और हाथ आगे कीजिए. और फिर देखिए आप सारी दुनिया में सबसे ज्यादा खुशी के धनी होंगे.


1 टिप्पणी:

बेनामी ने कहा…

Very nice artical Monika Ji.It is really very important to take care of our parents and elders onces.