शनिवार, 25 अक्तूबर 2008

पापा की सीख


बचपन से बेटी अपने पापा के बहुत नजदीक होती है. पापा के दिल का टुकड़ा. जरा सी खरोंच भी आ जाएँ तो पापा अपनी बिटिया की तकलीफ दूर करने को तत्पर रहते है.

मै भी वैसे ही अपने पापा के बहुत नजदीक हूँ. मेरे पापा मेरे आदर्श है. बचपन से ही मेरी दुनिया अपने पापा से शुरु होती है.मेरे हर हुनर को पापा ने पहचान दी. समय बीतता रहा और कब मेरी उम्र विवाह योग्य हो गई मैं नही जानती.लेकिन पापा के चेहरे पर कभी कभी वो चिंता की लकीरें दिखाई देती थी जो एक पिता को अपनी बेटी के विवाह के लिए होती है.

और एक दिन वो घड़ी भी आई जो एक बेटी और पिता के लिए सबसे मुश्किल घड़ी होती है. वो घड़ी थी मेरी विदाई की. मुझे माता पिता ने बचपन से अच्छे संस्कार देने का प्रयास किया था. पढ़ाई के कारण ज्यादातर समय मैं अपने घर से दूर रही हूँ इसलिए ग्रहकार्य कर पाने मे निपुण नही थी.

पापा इस बात को अच्छी तरह से जानते थे. पापा मेरे मार्गदर्शक और मेरे पथ प्रदर्शक भी रहे हैं. इसलिए मेरी समस्या को समझते हुए उन्होंने मेरे लिए एक पत्र लिखा और मेरी बिदाई के समय वह पत्र मेरे हाथ मे देकर नम आँखों से मुझे बोले मैंने तुम्हारे लिए कुछ लिखा है जो शायद तुम्हारे लिए उपयोगी साबित होंगा इसे बाद मे पढ़ लेना.


वह पत्र मेरे लिए किसी अमृत वचन से कम नहीं है. समय समय पर उस पत्र ने मेरा बहुत साथ दिया. मैं उस पत्र को आप सभी के साथ शेयर करना चाहती हूँ ताकि जैसे मुझे उस पत्र ने मार्गदर्शित किया कुछ और बेटियों को भी मार्गदर्शित कर सकें.

प्रिय मोना,

आज पहली बार तुम्हारे पापा को तुमसे कुछ कहने के लिए कलम का सहारा लेना पड़ रहा है. लेकिन मुझमें इतनी हिम्मत नहीं कि ये सब मैं तुम्हें उस क्षण बता सकूँ जब तुम अपने पापा को छोड़ नए दुनिया मे कदम रख रही होंगी.
बिटिया जब आपका विवाह होता हैं तो आप उस पूरे परिवार से जुड़ जाते हो. हमेशा अपने परिवार का मान सम्मान बनाए रखना. मैने और तुम्हारी मम्मी ने हमेशा तुम्हें अपने से बड़े का आदर करना सिखाया है इसे भूलना नही.
मै जानता हूँ कि तुम्हें घर के कार्य ठीक से नहीं आते लेकिन धैर्य व लगन से यदि कार्य करने का प्रयास करोंगी तो निश्चित रूप से सभी कार्य कर पाओंगी. तुम्हें कुछ जरूरी बातें बता रहा हूँ जो तुम्हें मदद करेंगी.

प्रातः जल्दी उठने की आदत डाले. इससे कार्य करने मे आसानी होती है साथ ही शरीर भी स्वस्थ रहता है.

घर के सभी बड़े लोगो को सम्मान दे व कोई भी कार्य करने से पूर्व उनकी अनुमति ले.

भोजन मन लगाकर बनाने से उसमें स्वाद आता है कभी भी बेमन या घबराकर भोजन नही बनाओ बल्कि धैर्य से काम लो.

यदि तुम्हें कोई कार्य नही आता तो अपने से बड़े से उसके बारे मे जानकारी लो.और उसे करने की कोशिश करो.

गुस्सा आदमी का सबसे बड़ा दुश्मन है. हमेशा ठंडे दिमाग से काम लो. जल्दबाजी मे कोई कार्य न करो.

गलतियाँ सभी से होतीं है. कभी भी कोई गलती होने पर तुरंत उसे स्वीकार करो. क्षमा माँगने से कभी परहेज़ न करो.

किसी के भी बारे मे कोई भी राय बनाने के पहले स्वयं उसे जाने,परखे तभी कोई राय कायम करे.सुनी हुई बातों पर भरोसा करने के बजाए स्वविवेक से निर्णय ले.

सास ससुर की सेवा करें. उन्हें दिल से सम्मान दे. उनकी बातों को नजर अंदाज न करे. न ही उनकी किसी बात को दिल से लगाए.

हमेशा अपने पापा के घर से उस घर की तुलना न करो. न ही बखान करो. वहाँ के नियम वहाँ के रिवाज अपनाने का प्रयास करो.

किसी भी दोस्त या रिश्तेदार को घर बुलाने के पहले घर के बड़े या पति की आज्ञा ले.

विनम्रता धारण करो. संयम से काम लो.कोई भी बिगड़ी बात बनाने का प्रयास करो बिगाड़ने का नही.

कोई भी कार्य समय पर पूरा करे. समय का महत्व पहचानो.हर कार्य के लिए निश्चित समय निर्धारित करो व उसे पूर्ण करो.

घर के सभी कार्य मे हर सदस्य की मदद करें. जो कार्य न आए उन्हें सीखे.


ऐसी और भी कई छोटी छोटी बातें है जिनका यदी ध्यान रखा जाएँ तो गृहस्थी अच्छी तरह से चलती है. बिटिया अपनी जिम्मेदारियो से मुँह नही फेरना बल्कि उन्हें अच्छी तरह से निभाना. मुझे तुम पर पूरा भरोसा है. मै जानता हूँ कि तुम अपने ससुराल मे भी अपने मम्मी पापा का नाम ऊँचा रखोंगी व हमे कभी तुम्हारी शिकायत नही आएँगी. तुम सदा खुश रहो और अपनी जिम्मेदारियाँ ठीक से निभाओ यही आशीर्वाद देता हूँ.

तुम्हारा पापा
राजेंद्र दुबे


दोस्तों , आज मै अपने ससुराल मे सबकी चहेती हूँ. ससुर जी मेरी तारीफ करते नही थकते. ये सब पापा की सीख का परिणाम है. उम्मीद करती हूँ कि आपको भी मेरे पापा की सीख मदद करेंगी. और आप भी अपने गृहस्थ जीवन मे सबके चहेते बने रहेंगे.

प्रेषक
मोनिका दुबे (भट्ट)

27 टिप्‍पणियां:

masijeevi ने कहा…

ओहृह
शुभकामनाएं।।

किंतु एक भी राय संघर्ष/प्रतिरोध के पक्ष में नहीं। सो तो भला हुआ कि आपको 'भले' लाग मिले वरना क्‍या होता।
कई काम की बातें बताईं आपके पिताजी ने मगर अपनी बिटिया की विदाई पर कम से कम मैं तो कुछ सुझाव अपना निजत्‍व बचाए रखने के भी देना चाहूँगा। जैसे अपने मित्रों को घर बुलाने की आजादी।

manthan ने कहा…

आपके पापा की सीख वाला पत्र मैंने एक महीने पहले ही वेबदुनिया.कॉम में पढा था. यह सीख सभी को लेनी चाहिए. मैंने इसे धरोहर के रूप में अपने इ-मेल में वेबदुनिया.कॉम का लिंक रखा है. एक बार फिर ब्लोग्वानी में पढ़कर अच्छा लगा.

अशोक कुमार पाण्डेय ने कहा…

yah ghulami aur aourat ko doyam darje ka nagrik banane vaali salahen hain. aadar karna ek baat hai aur agyaa ke liye muntazir rahna doosari.
mai apni beti ko katai yah salaah nahi dunga. sabke samman ke saath apne atmsamman ki raksha bhi zaruri hai.

सचिन मिश्रा ने कहा…

Bahut badiya.

सुभाष नीरव ने कहा…

मोनिका जी, आपके ब्लॉग पर पहलीबार आया हूँ। अच्छा लगा कि आपमें लिखने की ललक है और दुनिया को बदलने की आग। बस, अपनी इस ललक और आग को बनाये रखें।

Sanjeet Tripathi ने कहा…

शुभकामनाओं के साथ स्वागत है ब्लॉगजगत में।

MANVINDER BHIMBER ने कहा…

bahut sunder ....achahc kaga

शोभा ने कहा…

वाह! बहुत ही सुंदर लिखा है. दीपावली की शुभ कामनाएं

drparveenchopra ने कहा…

आप के पापा का पत्र पढ़ कर बहुत
अच्छा लगा। एकाएक ध्यान उस तरफ़ चला गया---बाबुल की दुआयें लेती जा, जा तुझ को सुखी संसार मिले !
आप ने अपना परिचय ढंग से दिया है ---मैं जा रही हूं ..उजालों की तमन्ना लेकर !....वाह, वाह, बहुत खूब ।।

Yusuf Kirmani ने कहा…

Goodluck and happy life. You are welcome at my blog. Explore more Life beyond your family...

dr. ashok priyaranjan ने कहा…

मोिनका जी,
पापा का पत्र िसफॆ आपके िलए ही नहीं बिल्क उन तमाम लडिकयों के िलए उपयोगी और मागॆदशॆक है जो ससुराल जा रही हैे । बहुत अच्छा और साथॆक िलखा है आपने । जीवन संघषॆ में छोटी-छोटी बातें बडी महत्वपूणॆ सािबत होती है । नारी जीवन के िविवध पक्षों पर मैने अपने ब्लाग में काफी िलखा है । समय हो तो आप पिढएगा और अपनी राय भी दीिजएगा । ज्योितपवॆ आपके जीवन में खुिशयों का आलोक िबखेरे , यही मंगलकामना है । दीपावली की ढेरों शुभकामनाएं ।

http://www.ashokvichar.blogspot.com

संगीता-जीवन सफ़र ने कहा…

सुंदर और सरल बात/ब्लाग-जगत में स्वागत है/ दीपावली की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ/

Vivek Gupta ने कहा…

बहुत सुंदर लिखा है| दीपावली की हार्दिक बधाईयाँ और शुभकामनाये |

श्यामल सुमन ने कहा…

नदिया क दो तीर हैं बेटी का संसार।
आधा जीवन इस तरफ आधा है उस पार।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।

नारदमुनि ने कहा…

har pita apni beti ko yahi sikhaye,
to beti sasural me dukh kahe ko paye.
bhaj man narayan narayan

संतोष अग्रवाल ने कहा…

आपका लेख पढ़ कर मैं मुस्कुरा भी रहा हूँ, आपसे स्नेह भी हो रहा है और अच्छा भी लग रहा है. हर बिटिया अपने पापा की लाडली होती है. मेरी भी दस साल की बेटी है और वह मेरी आँख का तारा है. इतनी छोटी सी होकर भी कभी वह मेरी बेटी बन जाती है, कभी बहन, कभी दोस्त तो कभी माँ. उसकी बात मैं विरले ही टालता हूँ, उसके कहने का तरीका ही कुछ ऐसा है. वह मुझे बेहद प्यार भी करती है, डांट भी देती है और रूठ भी जाती है. मेरी पत्नी हम बाप-बेटी के नाटक देखके किट-किटाती रहती है, पर हमें कोई असर नहीं होता. कभी-कभी यह सोच कर मन विचलित हो उठता है कि उसके चले जाने के बाद इस घर में मन कैसे लगेगा? खैर आपने इस लेख से मन के तारों को छू दिया है. इतना सुंदर पत्र लिखने के लिए आपके पापा को सतत नमस्कार. काश हर बाप अपनी बेटी को यही शिक्षा दे तो आज हमारे समाज में जो इतने घर टूट रहे है , ऐसी परिस्थति कभी न आए.

जितेन्द़ भगत ने कहा…

आपके पापा की सलाह को कहीं-कहीं समझौतावादी समझा गया है, लेकि‍न बहुत कम ऐसे पि‍ता होंगे जो ये चाहेंगे कि‍ बेटी, जरा भी आत्‍मसम्‍मान आहत हो तो वि‍रोध जताते हुए वापस घर चली आना। यह कतई व्‍यवहारि‍क नहीं होगा। क्‍या अपने परि‍वार में कई बार ठेस लगनेवाली बात नहीं सुननी पड़ती, फि‍र ससुराल में बड़े-बूढ़े कुछ कह दें तो वहॉं ईगो सामने क्‍यों लाया जाया। इनके पापा ने ये भी तो कहा है-
हमेशा अपने परिवार का मान सम्मान बनाए रखना।
ये बात अपने आप में व्‍यापक है और सभी चीजों के लि‍ए हौसला देता है।
साथ ही,
आपके पापा की बात में दो चीजें महत्‍वपूर्ण थीं-
धीर धारण करना और शांत दि‍माग से काम लेना।

निशा ने कहा…

aapke papa ki ray un sabhi ke liye mahatv poorn hai jo ek naya jevan shuru karne ja rahe hain. mai samajhti hun sirf ladkiyon hi nahi ladkon ke liye bhi. is patr ko padh ke hame apne se jud rahe us naye pariwaar ke prati jimmedari ka ahsaas hota hai. shayd ladkon ko bhi yahi seekh milti hai na sirf apne pariwaar ke liye apni jivansathi ke pariwaar ke liye bhi sochne ki.

Monika ji agar aap ye word verification hata den to achchha lagega

Raaj ने कहा…

पापा की सीख
दिल को छु लेने वाले शब्द हैं। निजत्व जैसी तो कोई बात ही न उठती।
एक बात बहुत ही महत्वपूर्ण है या तो किसी को अपना बना लो, और नही बना सकते तो ख़ुद उसके बन जायो
एक ही हुए न। और यही सीख आपके पापा ने दी आपको।
आजकल रोज़ घर टूटते हुए देखने में आता है। यदि ऐसे विचार हों सबके और सब इन बातो पर अमल करे तो शायद ऐसी नौबत न आए।
आप इन बातों पर अमल करती है अपनी जिंदगी में, और सफल रही तो इसका सीधा सा मतलब है की लोग चाहे जैसे भी हों, प्यार से सबको जीता जा सकता है। हाँ निजता, इगो आदि की बातें छोड़नी पड़ती हैं प्यार में।

लिखती रहिये ऐसी अच्छी बातें और रौशनी दिखायिए जो भी आपके संपर्क में आए....

दीपावली की शुभकामनायों के साथ

aloka ने कहा…

aap ko Diwali ki subhkamna aap ki blog achi lagi likh kar aapni bat mujhtak aa sakati hai.
aloka

Dr. VisH ने कहा…

Ohhh....firstly first Diwali ki Shubhkamnaye...nice touchy thought ...i feel when u write u always write with ur heart and experience....and i m impressed when i read tht writing is ur hobbie....

Amit K. Sagar ने कहा…

ब्लोगिंग जगत में आपका हार्दिक स्वागत है. लिखते रहिये. दूसरों को राह दिखाते रहिये. आगे बढ़ते रहिये, अपने साथ-साथ औरों को भी आगे बढाते रहिये. शुभकामनाएं.
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साथ ही आप मेरे ब्लोग्स पर सादर आमंत्रित हैं. धन्यवाद.

रचना गौड़ ’भारती’ ने कहा…

प्रसंशनीय.

उन्मुक्त ने कहा…

आपके पापा की बात अच्छी लगीं।

Voice Of The People ने कहा…

आपके पापा का पत्र आपको सबकी चहेती बना गया , काबिल इ तारीफ हैं आप भी और आप के पापा भी. काश लड़कों के पापा भी कुछ ऐसा पत्र शादी के वक़्त अपने बेटे को देते?

akhilesh kumar ने कहा…

very good

Vishal ने कहा…

Nice one