सोमवार, 13 अक्तूबर 2008

अनुत्तरित प्रश्न


अनेक प्रश्न ऐसे है जो कभी दोहराए नही जाते
बहुत उत्तर भी ऐसे हैं जो कभी बतलाए नही जाते

इसी कारण अभावो का सदा स्वागत किया मैंने
कि घर आए मेहमान कभी लौटाए नही जाते

हुआ क्या आँख से आँसू अगर बाहर नही निकले
बहुत से गीत भी ऐसे है जो कभी गाए नही जाते

बनाना चाहती हूँ स्वर्ग तक सोपान सपनों का
मगर चादर से ज्यादा पाँव फैलाए नही जाते

प्रेषक
मोनिका दुबे (भट्ट)

3 टिप्‍पणियां:

संजय भास्कर ने कहा…

किस खूबसूरती से लिखा है आपने। मुँह से वाह निकल गया पढते ही।

संजय भास्कर ने कहा…

आप बहुत सुंदर लिखती हैं. भाव मन से उपजे मगर ये खूबसूरत बिम्ब सिर्फ आपके खजाने में ही हैं

संजय भास्कर ने कहा…

हर शब्‍द में गहराई, बहुत ही बेहतरीन प्रस्‍तुति ।