रविवार, 6 जून 2010

नई सीख










शुक्रिया मेरी नई जिंदगी मेरे जीवन मे नए रंग भरने का शुक्रिया. तुम्हारी मासूम किल्कारिया नटखट हँसी चंचल आँखे देख कर मुझे महसूस होता हे की मे अभी तक कितने बड़े सुख से वंचित थी. तुमने आकर वो कमी पूरी की. मेरे अधूरेपन को पूरा किया. और मुझे हर दिन नई सीख भी देते हो.

आज महसूस होता हे की मम्मी पापा ने भी इसी तरह रात रात भर जाग कर अपनी परवाह किए बिना किस तरह से हमे बड़ा किया होगा और हम कितनी आसानी से उनका दिल दुखा देते हे. आज महसूस होता हे की जब मम्मी प्यार से खाना बनाकर खिलाती थी और हम स्कूल या कॉलेज जाने की जल्दी मे बिना खाए ही चल देते थे. छोटी छोटी बात मे उनसे रूठ जाते थे. पापा से अपनी फरमाइश पूरी करने के लिए अड़ जाते थे. और केसे मम्मी पापा भी हमारी हर खुशी हर फरमाइश को पूरा करने की कोशिश करते थे. हमारी खुशी देख कर उनके चेहरे का सुकून आज भी आँखो मे घूमता हे. आज भी मम्मी पापा अपनी बिटिया की खुशी के लिए बेटे की खुशी के लिए हर संभव प्रयास करते हे.

मेरे बेटे तुमने मेरी जिंदगी मे आकर मुझे अहसास दिलाया की औलाद को बड़ा करना कितना मुश्किल हे और जब वही औलाद माता पिता के व्रद्धावस्था मे उन्हे सहारा न दे तो उन्हे कितनी तकलीफ़ होती होगी. मेरे बेटे तुमने मुझे मेरे गुस्से पर काबू रखना धीरज रखना सिखाया. कितनी बार मम्मी से मे गुस्सा होती थी और वो मुझे मनाती रहती थी. कितनी बार मम्मी खाना की प्लेट लगाती और छोटा भाई कुछ फरमाइश करता तो अपना खाना बीच मे छोड़ कर मम्मी उसकी ज़िद पूरी करती. कभी हम बीमार होते तो पूरी रात मम्मी पापा सो नही पाते.

मुझे याद हे अपने बचपन मे एक बार मेने पापा से साइकिल लाने की ज़िद की थी और पूरा दिन कुछ नही खाया था पापा मेरे लिए १५० किलोमीटर दूर से बाइक पर पीछे सवार होकर और हाथ मे छोटी साइकिल लिए घर आए थे पापा के हाथ सूज गये थे इतनी दूर साइकिल उठाने से. लेकिन मे उनकी हाथो की सूजन नही देख पाई बल्कि अपनी साइकिल देख खुशी से झूम उठी और पापा भी अपना दर्द भूल खुशी से मुस्कुराने लगे.

मुझे पहली बार होस्टल के लिए भेजते समय मम्मी पापा की आँखे कितना कुछ कह रही थी. कितनी हिदायते और साथ मे नम आँखे लिए दोनो मुझे स्टेशन छोड़ने आए थे. और हॉस्टल से जब भी घर जाती मम्मी तरह तरह के पकवान बना बना कर खिलाती सारी मेरी पसंद का खाना पूरा दिन मम्मी किचन मे लगी रहती और पापा बाजार से मेरी ज़रूरत की सारी चीज़े लेकर आते. मेरी पहली जॉब की पहली सेलेरी से जब मम्मी के लिए साडी और पापा को शॉल दिया था तो दोनो रोने लगे थे.

शादी के समय भी पापा ने मुझे बहुत प्यारा सा तोहफा एक खत के रूप मे दिया था ( आप उसे मेरे पुराने पोस्ट मे "पापा की सीख" के रूप मे देख सकते हे.http://bhattmonika.blogspot.com/2008/10/blog-post_25.html) जो मेरे लिए बहुत अनमोल हें.

ये सारी बाते आज अपने बेटे को देख आँखो मे घूमती हे. और मे मन ही मन ये सोचती हू की अब कभी मम्मी पापा का दिल किसी बात से नही दुखे ये कोशिश करूँगी. और आप से भी यही अनुरोध करूँगी की मम्मी पापा का दिल नही दुखाना कभी भी.


प्रेषक
मोनिका भट्ट (दुबे)

32 टिप्‍पणियां:

निशांत मिश्र - Nishant Mishra ने कहा…

भावुक कर देनेवाली पोस्ट. आज पढी गयी सबसे अच्छी पोस्ट.

धन्यवाद. यदि आप मेरे ब्लौग तक नहीं आतीं तो पता नहीं मुझे यह पढ़ने को कब मिलता.:)

माधव ने कहा…

really touching

भूतनाथ ने कहा…

MAMMI.....PAAPAA....AISE HI HOTE HAIN...HAI NAA MONIKA......??BAHUT PYAARI POST HAI YAH TUMHAARI.....

डा.मीना अग्रवाल ने कहा…

मोनिका लगभग एक साल बाद इतनी सुन्दर पोस्ट पढ़कर मन गद-गद हो गया.तुम्हें दोहरी बधाई.इसी तरह लिखती रहो ऊँचाइयों पर पहुँचती रहो.तुम्हारी इस भावुक कर देने वाली रचना को पढ़कर मम्मी-पापा की याद ताजा हो गई.पुनः बधाई.

डॉ.मीना अग्रवाल

Shekhar Kumawat ने कहा…

बहुत खूबसूरत भाव

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत बधाई...पोस्ट में ममत्व झलक रहा है.

Udan Tashtari ने कहा…

फोटो तो लगाओ बेटे की.

महफूज़ अली ने कहा…

पहली बार आपके ब्लॉग पर आना हुआ..... बहुत अच्छा लगा.... यह पोस्ट बहुत अच्छी और टची लगी....

रिगार्ड्स....

Monika ने कहा…

समीर जी आपके कहे अनुसार बेटे का फोटो लगा रही हू. धन्यवाद

Udan Tashtari ने कहा…

वाह!! बहुत ही क्यूट...प्यारा बेटा है. ढेर आशीष!!!

Gourav Agrawal ने कहा…

मोनिका जी आपके ब्लॉग पर पहली बार आया हूँ
अपने तो सच में इमोशनल कर दिया बचपन की यात्रा करवा के
वहां पहुँच कर ऐसा लगा जैसे
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
काश हर बात जिसे मनवाया चिल्लाकर झल्लाकर ..
उसी पर मैं बस मासूमियत से मुस्कुराया होता ..
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सच में सीधा मन पर अटैक कर दिया आपके लेख ने
ये एहसास नहीं भूलूंगा ... धन्यवाद

सच में क्यूट है "चुन्नू" ( अभी अभी फोटो देख कर नाम दे दिया अपनी और से )

आशीष/ ASHISH ने कहा…

Matritv ki shubhkaamnaaen!
Ashish ka Ashish aapke putr ko!
Main bhi Maa ka intezaar kar raha hoon,
Agle hafte aa jo rahee hai!!!

Manish ने कहा…

ऐसे ब्लाग मैने कम ही देखे हैं। दिल से लिखे गये ब्लाग……
आपसे छोटा हूँ, ज्यदा कुछ कह नही सकता, लेकिन मम्मी पापा के बारे में जो लिखा, वो बातें मन को छू गयी
अभी इनका नामकरण नही हुआ???

Monika ने कहा…

मनीष जनाब का नाम दक्ष हे

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

मन को छू गयीं आपकी अनुभूतियाँ।
--------
करे कोई, भरे कोई?
हाजिर है एकदम हलवा पहेली।

Adarsh ने कहा…

AAp jitni sundar hai usse jyada aapke vichar khubsurat hai.. really very touching Monika ji

दिगम्बर नासवा ने कहा…

भावना में लिखी आपकी पोस्ट .. संवेदनशील और अनुपम भाव लिए है ... सच है माँ या पिता बनने के बाद अपने माँ बाप की कद्र आ जाती है ... ये भाव हमेशा बने रहना चाहिए ...

Tapan ने कहा…

Bus Ek Maa ki Mohabat Dikhai Deti he.

Jami par ek hi aurat dikhai deti he.

ae budi maa tere chehre ki jhuriyo ki kasam,

har ek lakir me janat dikhai deti he.



mast likha he di...

Deep ने कहा…

bhabhi bahut hi emotional article likha hai aap ne ise pedker papa mummy ki yaad aa gayi.

Aseem ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
Aseem ने कहा…

आपकी आवाज सीधे एक माँ और एक बेटी के ह्रदय से आई है और हमारे ह्रदय तक पहुंची है. बहुत अच्छा लिखा है आपने - निश्छल और बेबाक..

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

एकदम सही. बहुत सी बातें हैं ज़िंदगी में जो किताबों से नहीं पढ़ी जातीं.

संजय भास्कर ने कहा…

पहली बार आपके ब्लॉग पर आना हुआ..... बहुत अच्छा लगा.... यह पोस्ट बहुत अच्छी लगी....

संजय भास्कर ने कहा…

मन को छू गयीं आपकी अनुभूतियाँ।

संजय भास्कर ने कहा…

मुझे आपका ब्लोग बहुत अच्छा लगा ! आप बहुत ही सुन्दर लिखते है ! मेरे ब्लोग मे आपका स्वागत है !

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने कहा…

सच है, माता या पिटा बने बिना मातृत्व की उस दैवी भावना को समझ पाना असंभव है.

छत्तीसगढ़ पोस्ट ने कहा…

bahut sundar

छत्तीसगढ़ पोस्ट ने कहा…

bahut sundar

छत्तीसगढ़ पोस्ट ने कहा…

bahut sundar

अनिल पाण्डेय ने कहा…

मोनिका जी, आपका ब्लॉग देखा बहुत ही अच्छा लगा।

डा.मीना अग्रवाल ने कहा…

माँ बनना एक ऐसा अहसास है,जिसमें ऐसे स्वर्गिक आनंद की अनुभूति होती है, जिसे शब्द नहीं दिए जा सकते.बेटॆ की बधाई और ढेर सारा आशीर्वाद. बेटे को भी प्यार और आशीर्वाद.हमारी कामना है कि दक्ष हर क्षेत्र में दक्ष बने और ऊँचाइयों को छूए.इसी तरह लिखती रहा करो तुम्हारी लेखनी में बहुत दम है.

डॉ. मीना अग्रवाल

Urvi ने कहा…

straight frm the heart of mother...very very touchin..